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3-Chapter -The Gita Amessage to Humanity through Hindi Poetry-E-Book

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तृतीय अध्याय   समर्पित है   ऊन सभी मित्रों के लिए,   जो अपनी मीठी यादें छोड़ कर इस जहां से अपने अनजान शहर को जा चुके हैं हे माधव ! ज्ञान श्रेष्ठ पुरुष यहां , कर्म से बढ़कर माना है , गंभीर कर्म में ना लगना , जब फल भयंकर जाना है ,  (3/1) शब्दों का खेल मेल है , हे माधव !, बुद्धि को मोह लेता है सुस्पष्ट मार्ग दर्शाओ , हे भगवन !, जो कल्याण प्राप्त कर देता है   (3/2) सांख्य योग की निष्ठा , ज्ञान योग में निहित है , योगी समझे कर्मयोग , निष्ठा इससे संचित है (3/3) ज्ञान योग वर्णित है पहले , आसक्तिहीन है जो , फलेच्छा ना भ्रमित करती , लक्ष्य परम तत्व रखते है जो (3/4) आश्चर्य कर्म मौजूद यहां , मनुष्य को करने पड़ते हैं , अकर्म बने निष्कर्मता , फल दूर sada ही रहते हैं   (3/5) कभी समय ना ऐसा आया , मानव रहा कर्म से दूर , स्वभाव जनित है कर्म में लीन , करता कोई ना इनसे दूर   ,...